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रीतिकाल — रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त — बिहारी, घनानंद और परीक्षा-फ़ंद
UP PGT स्तर पर रीतिकाल का पूर्ण-अध्ययन: रीतिकाल की परिभाषा व काल-सीमा (1700-1900 ई.), तीन-शाखाएँ (रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त), प्रमुख-कवि (बिहारी, घनानंद, देव, भूषण, आलम, कबित), प्रमुख-रचनाएँ (बिहारी-सतसई, घनानंद-काव्य, देव-काव्य), रीतिकाल की विशेषताएँ (शृंगार-रस, कल्पना, अलंकार-युक्ति), और परीक्षा के स्थायी-फ़ंद — प्रत्येक-कवि पर काल-शाखा-रचना-सेट।
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